प्रदेश में गढ़वाली, कुमाऊंनी एवं जौनसारी को राजभाषा का दर्जा दिया जाएः नैथानी

न्यूज डेस्क / देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने अपने ‘काम की बात’ भाग 3 में उत्तराखंड में गढ़वाली कुमाऊंनी एवं जौनसारी बोली भाषा का इतिहास, दशा एवं दिशा पर अपने फेसबुक लाइव के माध्यम से कहा कि उत्तराखंड में दुध बोली भाषा समाप्ति की कगार पर है। आने वाली पीढ़ी केवल समझती है किंतु बोल नहीं पाती, कई लोग तो अब समझ भी नहीं पाते। भाषा बोली किसी भी संस्कृति एवं सभ्यता का आईना होती है और एक भाषा की बोली की समाप्ति का अर्थ है पूरी सभ्यता और संस्कृति का नष्ट होना।

उन्होंने कहा कि भारत में 780 भाषाओं में से 250 भाषाएं विलुप्त हो चुकी है। साथ ही 400 भाषाएं एवं बोलियां बिलुप्त की श्रेणी में में आ चुकी है, जिनमें से गढ़वाली, कुमाऊनी एवं जौनसारी को भी संयुक्त राष्ट्र ने संरक्षण की श्रेणी में रखा है जो बहुत ही गंभीर चिंता का विषय है। काम की बात भाग-तीन में पूर्व मंत्री ने गढ़वाली, कुमाऊंनी एवं जौनसारी भाषा के संरक्षण हेतु केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील की है। पूर्व मंत्री ने कहा कि भारत के संविधान की अनुसूची में 22 भाषाओं के साथ-साथ गढ़वाली, कुमाऊनी एवं जौनसारी भाषा को भी सम्मिलित किया जाए। गढ़वाली, कुमाऊंनी एवं जौनसारी भाषा के उन्नयन हेतु प्रदेश में अकादमी खोली जाए।

हरीश रावत के मुख्यमंत्रित्व काल में मेरे द्वारा एससीईआरटी में गढ़वाली, कुमाऊंनी एवं जौनसारी भाषा को प्रदेश के पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने का पूरा प्रारूप तैयार किया गया था, उसे तत्काल लागू किया जाए। अभी केंद्र द्वारा नई शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषा को बेसिक से प्रारंभ करने का प्रावधान किया गया है उसको स्नातकोत्तर स्तर तक सम्मिलित किया जाए। उन्होंने लोक भाषा के कलाकारों, लेखकों, गीतकारों-संगीतकारों एवं वाद्य यंत्रों की जानकारी एवं उपयोग करने वालों के संरक्षण हेतु सरकार से उन्हें प्रोत्साहन भत्ता प्रदान करने की अपील की। पूर्व मंत्री ने कहा कि हरीश रावत द्वारा जागर महाविद्यालय की घोषणा को पूरा किया जाए साथ ही पद्मश्री प्रीतम भरतवाण को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी अतः उन्हें पूरे अधिकार भी प्रदान किए जाए।

प्रदेश में गढ़वाली, कुमाऊंनी एवं जौनसारी को राजभाषा का दर्जा दिया जाए। पूर्व मंत्री ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस उक्त बिंदुओं पर केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार से शीघ्र समाधान की अपील करती है।

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