भारतीय स्टार्टअप्स में चीन कर चुका है 5 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश, जानिए आगे की रणनीति

न्यूज डेस्क / बीएसएनके न्यूज। भारत और चीन के बीच तनातनी पर चीनी कंपनियों के साथ भारतीय कंपनियों की भी नजर है। कारण कि भारत में कारोबार कर रहे ढेर सारे स्टार्टअप्स, इसके अलावा चीन की कई कंपनियों ने भारत में मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाई है या लगाने की योजना बना रही हैं। फिलहाल चीन के लिए सबसे बड़ी दिक्कत चीन की टेलीकॉम कंपनी हुवावे को लेकर है। यह कंपनी अब भी भारत की तेजी से बढ़ती इंटरनेट अर्थव्यवस्था में 5जी नेटवर्क स्थापित में मदद करने की दौड़ में है।

चीनी कंपनियां यहां लंबे समय के लिए कारोबार करने की सोच रही
मार्च में प्रकाशित ब्रूकिंग्स इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी कंपनियां भारत में लंबे समय के लिए कारोबार करने की सोच रही हैं। भारतीय कंपनियों में उनका निवेश उन्हें बाजार में स्थायी हिस्सेदारी प्रदान करता है। मार्केट रिसर्च फर्म आईडीसी के मुताबिक पिछले साल भारत में टॉप पांच सबसे ज्यादा बिकने वाले स्मार्टफोन मेकर्स में से चार चाइनीज थे- इसमें शाओमी, वीवो, ओप्पो और रियलमी हैं। दक्षिण कोरिया की सैमसंग एकमात्र गैर-चीनी ब्रांड था जो नंबर 2 पर था।

चीनी कंपनियों ने भारतीय स्टार्टअप में अच्छा खासा निवेश किया
भारत के स्टार्टअप सेक्टर में चीन की कंपनियों का पूरी तरह से नियंत्रण जैसा है। इन कंपनियों ने यहां के स्टार्टअप में अच्छा खासा निवेश किया है। जिन स्टार्टअप में निवेश किया गया है उसमें यह प्रमुख कंपनियां हैं।

एंट फाइनेंशियल- अलीबाबा- भारत में सबसे प्रसिद्ध चाइनीज इनवेस्टर्स में एंट फाइनेंशियल है। यह जैक-मा के ओनरशिप वाली अलीबाबा समूह की फिनटेक आर्म है। इसने पेटीएम और स्नैपडील में करोड़ों डॉलर का निवेश किया है। भारत की सात कंपनियों में इसने 2.7 अरब डॉलर का निवेश किया है। पेटीएम में पेटीएम माल में भी इसने पैसा लगाया है। नवंबर 2019 में एंट फाइनेंशियल ने कहा कि यह भारत और दक्षिण एशिया में स्टार्टअप निवेश में अरबों डॉलर के नए निवेश को देख रहा है।

टेंसेंट- यह भी भारतीय स्टार्टअप में अग्रेसिव निवेश करती है। चीन में यह वीचैट प्लेटफॉर्म चलाती है। यह वाट्सऐप के जैसा है। गेमिंग ऐप तथा ई कॉमर्स बिजनेस में सक्रिय है। इसका भारत में 15 स्टार्टअप में 2 अरब डॉलर का निवेश है।यह कंपनी ढेर सारे नए स्टार्टअप में अग्रेसिव निवेश की योजना बना रही है। इसके तहत यह 10-15 मिलियन डॉलर निवेश करना चाहती है।

सुनवेई कैपिटल- इसने भारतीय स्टार्टअप में कई चरणों में भारी निवेश किया है। प्रमुख निवेश कंपनियों में जोमैटो, मीशो, मैसेजिंग एप शेयरचैट और क्रेजीबी तथा लोनटॉप का समावेश है। इसने 17 कंपनियों में 12.9 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। इसने खाताबुक, मायगेट, नियो सॉल्यूशंस जैसे विकासशील और पॉलिसीबाजार तथा उड़ान जैसे अन्य स्थापित हो चुके प्लेयर्स का समर्थन किया है।

फोसन ग्रुप- इसकी स्थापना 2013 में हुई थी। यह भारत में इंट्रेस्टिंग चाइनीज इनवेस्टर है। इसने भारत के 12 स्टार्टअप कंपनियों में 85 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। इसमें हाल में इक्सिगो और डेलहीवरी तथा लेट्स ट्रांसपोर्ट, मायलो और अन्य का समावेश है। तेज कपूर द्वारा चलाई जा रही यह कंपनी छोटे- छोटे निवेश करती है। यह केवल भारतीय स्टार्टअप में ही निवेश करती है।

शाओमी- स्मार्टफोन की पॉपुलर निर्माता शाओमी भी भारतीय स्टार्टअप में एक्टिव रूप से निवेश करती है। इसने शेयरचैट, क्रेजीबी और कुछ अन्य कंपनियों में निवेश किया है। 2018 में इसने मनू कुमार जैन को भारत का हेड नियुक्त किया था। कंपनी भारतीय स्टार्टअप में 6,000 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बनाई है। अभी तक इसने 6.1 करोड़ डॉलर का निवेश 8 कंपनियों में किया है।

हिलहाउस कैपिटल- इस कंपनी ने बैदू, टेंसेंट, ग्रैब एयरबीएनबी और अन्य में निवेश किया है। भारत में इसने 165 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। इसने सात कंपनियों में यह निवेश किया है। इसमें स्विगी, उड़ान और क्रेड प्रमुख हैं। 2005 में शुरू हुई हिलहाउस ने मोबिलिटी सेगमेंट में एक्टिव निवेश किया है। 2014 में इसने 50 मिलियन डॉलर का निवेश ऑन लाइन ऑटोमोबाइल कंपेरिजन प्लेटफॉर्म कार देखो में किया है।

टी आर कैपिटल- यह सेकेंडरी इन्वेस्टर है। इसने भारत में मुंबई में ऑफिस बनाया है। इसने भारत में 9 कंपनियों में निवेश किया है। इसमें फ्लिपकार्ट, लेंसकार्ट, अर्बन लेडर और बिग बॉस्केट आदि हैं। इसने करीबन 111 मिलियन डॉलर का निवेश किया है।

ग्रेट वॉल मोटर्स (जीवीएम)- इस कंपनी ने महाराष्ट्र सरकार के साथ इसी हफ्ते में 7,600 करोड़ रुपए का निवेश का एमओयू किया है। इससे 3,000 लोगों को रोजगार मिलेगा।

नुकसान के बाद भी भारत के स्टार्टअप में निवेश करती हैं चीनी कंपनियां
मार्च 2020 की गेटवे हाउस की रिपोर्ट कहती है कि चीन के वीसी और टेक कंपनियों ने भारत में 3.6 अरब डॉलर का निवेश किया है। हालांकि यह तब हुआ है, जब पेटीएम 3,690 करोड़ का नुकसान 2019 में पेश किया था। फ्लिपकार्ट ने इसी दौरान 3,837 करोड़ रुपए का निवेश किया था।

ई-कॉमर्स रिटेल सर्विस में चीन का ज्यादा निवेश
भारत में ज्यादातर जो चीनी निवेश आते हैं वे ई-कॉमर्स रिटेल सर्विस में आते हैं। केपीएमजी की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार ई-टेल और अन्य इससे जुड़े अन्य सेक्टर जैसे लॉजिस्टिक, वेयरहाउसिंग, आईटी सेक्टर 2021 तक 1.45 मिलियन रोजगार का निर्माण करेंगे। हालांकि कोविड-19 के कारण से ऑन लाइन डिमांड से इसमें और वृद्धि अब हो सकती है। भारत के डिजिटल सेक्टर में चीन का 50 प्रतिशत निवेश है। ये निवेश एप और सोशल मीडिया तथा ओटीटी प्लेटफॉर्म में हैं।

स्रोत्र – दैनिक भास्कर

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